जब कोरिया कलेक्टर बनीं रक्तदाता, बैकुंठपुर में रक्तदान शिविर में दिखा जनसेवा का जज्बा



कोरिया जिले के बैकुंठपुर में विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर मानवता, सेवा और सामाजिक सरोकार का प्रेरणादाई संगम देखने को मिला। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा कोरिया एवं कोयला मजदूर सभा बैकुंठपुर क्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में गौतम सदन एसईसीएल बैकुंठपुर में आयोजित विशाल रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेकर रक्तदान किया। सुबह से ही युवाओं, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की लंबी कतारें रक्तदान के लिए नजर आई जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और जनभागीदारी का माहौल बना रहा।कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने स्वयं रक्तदान कर शिविर का शुभारंभ किया। उनके इस कदम ने उपस्थित लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम में जिला अस्पताल बैकुंठपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. प्रशांत सिंह, एसईसीएल बैकुंठपुर के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद तथा भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की जिला उपाध्यक्ष गीता राजवाड़े सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. प्रशांत सिंह ने कहा कि रक्तदान किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं, प्रसूति, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त की निरंतर आवश्यकता रहती है, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान समाज की बड़ी जरूरत है। एसईसीएल बैकुंठपुर के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। उन्होंने लोगों से नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की। वहीं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की जिला उपाध्यक्ष गीता राजवाड़े ने कहा कि रक्तदान महादान है और एक यूनिट रक्त किसी के जीवन में नई उम्मीद और नया जीवन दे सकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से इस जनहितकारी अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।शिविर के दौरान रक्तदाताओं का सम्मान कर उन्हें प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह आयोजन न केवल रक्त भंडार को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ बल्कि समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी बना। सेवा और समर्पण की भावना से ओतप्रोत इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि रक्तदान वास्तव में जीवनदान है।

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