जबलपुर हादसे के बाद से ऑडिट के बहाने सिस्टम सो रहा, गर्मी की छुट्टियों में सैलानी मायूस
गर्मी की छुट्टियों में अगर आप परिवार के साथ कोरिया जिले के 'झुमका बोट क्लब' में एन्जॉय करने की सोच रहे हैं, तो जरा ठहरिए। जो जगह कभी पर्यटकों के लिए सुकून और रोमांच का केंद्र थी, वह अब बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है। हालात ये हैं कि मनोरंजन के नाम पर यहां कुछ नहीं बचा है, लेकिन आपकी जेब काटने का पूरा इंतजाम ठेकेदारों ने कर रखा है। जबलपुर क्रूज हादसे के बाद सुरक्षा का हवाला देकर प्रशासन ने 9 दिन से बोटिंग बंद कर रखी है, लेकिन 'सुरक्षा ऑडिट' करने वाली टीम का दूर-दूर तक अता-पता नहीं है। कुल मिलाकर करोड़ों का यह प्रोजेक्ट अब महज एक 'फोटोशूट' की जगह बनकर रह गया है।
पार्किंग के नाम पर आम आदमी से 'खुली लूट
पर्यटकों का स्वागत यहां सुविधाओं से नहीं, बल्कि महंगी पर्ची थमाकर होता है। पहले यहां दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क 5 से 20 रुपए हुआ करता था। अब इसे बढ़ाकर सीधे 20 से 40 रुपए कर दिया गया है। जब आम आदमी इस मनमानी का विरोध करता है, तो वसूली में लगे युवकों का रटा-रटाया जवाब होता है- टेंडर बहुत महंगा मिला है, इसलिए चार्ज बढ़ा दिया गया है। सवाल यह है कि ठेके की इस महंगी कीमत का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते?
सिर्फ 'सेल्फी पॉइंट' बनकर रह गया पर्यटन स्थल झुमका
खतरनाक हो चुका फ्लोटिंग ब्रिज: क्रूज तक जाने के लिए बनाया गया प्लास्टिक का फ्लोटिंग ब्रिज (तैरता हुआ पुल) बुरी तरह से टूट-फूट गया है। इसके ब्लॉक उखड़ चुके हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।
कचरे में तब्दील हो रहा किनारा: जिस बांध की खूबसूरती निहारने लोग आते हैं, उसके किनारों पर थर्माकोल, प्लास्टिक और पन्नियों का अंबार लगा है। स्वच्छता अभियान यहां दम तोड़ता नजर आ रहा है।
बच्चों के लिए जानलेवा बने झूले: पार्क की स्थिति बेहद दयनीय है। फिसलपट्टी (स्लाइडर) और सी-सॉ जैसे झूले टूट चुके हैं। लोहे के एंगल बाहर आ गए हैं, जिससे खेलते समय बच्चों को गंभीर चोट लग सकती है।
कबाड़ हो रहीं नावें: वर्तमान में यहां एक क्रूज, 2 स्पीड बोट और 2 शिकारा बोट ही हैं। एक स्पीड बोट हमेशा खराब रहती है। पुरानी पैडल बोट्स पूरी तरह कबाड़ होकर किनारे फेंक दी गई हैं।
सिस्टम की सुस्ती: 9 दिन से ऑडिट का इंतजार मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए नाव हादसे के बाद प्रशासन ने सतर्कता दिखाते हुए 3 मई से झुमका में बोटिंग रोक दी थी। दावा किया गया था कि सुरक्षा ऑडिट के बाद ही संचालन होगा। 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन ऑडिट का काम शुरू तक नहीं हुआ है। यह ऑडिट कौन करेगा, कब होगा, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।
बोटिंग बंद, पर्यटक आइलैंड तक नहीं जा पा रहे
यहां घूमने आए विश्वजीत तिवारी, ऋषि पाण्डेय और मनोज दुबे ने कहा कि बोटिंग बंद होने से पर्यटक आइलैंड तक नहीं जा पा रहे हैं। बोटिंग के बिना यहां आने का कोई मतलब नहीं रह जाता, सारा उत्साह ठंडा पड़ जाता है। प्रशासन को जल्द से जल्द ऑडिट पूरा कर बोटिंग शुरू करानी चाहिए।
अंधेरे में डूब जाता है 'अप्रतिम् कोरिया'
शाम के समय सनसेट (सूर्यास्त) का नजारा कैमरे में कैद कर रहीं महिलाओं ने कहा कि यहां का दृश्य बहुत शानदार होता है। लेकिन जैसे ही अंधेरा घिरता है, यहां रुकना मुश्किल हो जाता है। पार्क और आसपास लगी अधिकांश लाइटें या तो खराब हैं या चालू नहीं की जातीं। गर्मी की छुट्टियों में परिवार देर शाम तक समय बिताना चाहते हैं, लेकिन अंधेरे के कारण उन्हें मायूस होकर जल्दी लौटना पड़ता है।
जल्द से जल्द बोटिंग शुरू कराएंगे: एसडीएम
जल्द से जल्द शुरू करेंगे बोटिंग झुमका में बंद बोटिंग को सुरक्षा ऑडिट के बाद जल्द से जल्द शुरू कराया जाएगा। अन्य कमियों को भी दूर करेंगे। उमेश पटेल, एसडीएम, बैकुंठपुर

