छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर स्थित कंचनपुर में बनाए गए मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल (एमसीएच) भवन की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दो मंजिला भवन हैंडओवर-टेकओवर से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है। नई बिल्डिंग की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं जबकि कई जगहों पर प्लास्टर भी झड़ रहा है।
अस्पताल की हालत सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने आरोप लगाया कि सीजीएमएससी के जरिए स्वीकृत यह भवन महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बनाया गया था लेकिन उद्घाटन से पहले ही इसकी हालत बदहाल हो गई है। उन्होंने कहा कि नई बिल्डिंग में इस तरह की दरारें और प्लास्टर झड़ना सीधे तौर पर निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने निर्माण एजेंसी संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। तो वहीं कांग्रेस नेता फारूक सिद्दीकी ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाए जा रहे इस अस्पताल को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है। उनका कहना है कि जिस तरह से भवन की दीवारों में दरारें और प्लास्टर झड़ने की तस्वीरें सामने आई हैं उससे साफ है कि निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया गया।उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वहीं परेश कुमार ने राज्य सरकार पर स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भवन की वर्तमान स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि निर्माण में कितना बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने शासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की। इधर भाजपा नेता शैलेश शिवहरे ने माना कि भवन की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए और शिकायत मिलने के बाद निरीक्षण भी किया गया है। उन्होंने कहा कि शिकायत वाजिब है इसलिए अब तक भवन का हैंडओवर-टेकओवर नहीं हुआ है। मामला मंत्री और विधायक के संज्ञान में है तथा ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा नहीं होगा तब तक भुगतान नहीं किया जाएगा। हालांकि कांग्रेस द्वारा एफआईआर और ब्लैकलिस्टिंग की मांग पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है।उन्होंने यह भी माना कि निर्माण की मॉनिटरिंग सही तरीके से नहीं होने के कारण दरारें आई हैं जिन्हें जल्द सुधार लिया जाएगा। अब सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सरकारी स्वास्थ्य भवन उद्घाटन से पहले ही दरकने लगे तो आम लोगों की सुरक्षा और सरकारी निर्माण कार्यो की गुणवत्ता पर कैसे भरोसा किया जाए।मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाए गए इस अस्पताल की बदहाल स्थिति ने पूरे निर्माण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

